मीडिया टूर में गूंजा भगवान शिव का जयकारा, भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक गाथा ने किया भावविभोर

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मीडिया टूर में गूंजा भगवान शिव का जयकारा, भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक गाथा ने किया भावविभोर
सहारा जीवन न्यूज़
गुवाहाटी। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत आयोजित मीडिया टूर के दौरान असम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर पत्रकारों को मिल रहा है। इसी क्रम में श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक गाथा ने पत्रकारों को भारतीय सनातन परंपरा और धर्म-संस्कृति की गहराई से परिचित कराया।शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भीम नामक एक शक्तिशाली राक्षस कामरूप क्षेत्र में अपनी माता के साथ रहता था। वह राक्षसराज रावण के छोटे भाई कुम्भकर्ण का पुत्र था। अपने पिता की मृत्यु भगवान श्रीराम के हाथों होने की जानकारी मिलने के बाद भीम के मन में प्रतिशोध की भावना उत्पन्न हो गई। उसने भगवान श्रीहरि को पराजित करने के उद्देश्य से एक हजार वर्ष तक कठोर तपस्या की।उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे अत्यंत शक्तिशाली वरदान दिया। वरदान मिलते ही भीम का अत्याचार बढ़ गया। उसने देवताओं को पराजित कर देवलोक पर अधिकार कर लिया और धीरे-धीरे अनेक लोकों में अपना आतंक कायम कर दिया।
इसी दौरान उसने कामरूप के शिवभक्त राजा सुदक्षिण को भी बंदी बना लिया। राक्षस के अत्याचार से धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ तक बाधित होने लगे। यज्ञ, दान, तप और स्वाध्याय जैसे धार्मिक कार्य रुक गए। इससे चिंतित ऋषि-मुनि और देवगण भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
उधर बंदीगृह में राजा सुदक्षिण ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। वे पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा कर रहे थे। जब राक्षस भीम ने यह देखा तो वह क्रोध से भर उठा और तलवार से शिवलिंग को नष्ट करने के लिए आगे बढ़ा।
लेकिन जैसे ही उसने प्रहार करना चाहा, पार्थिव शिवलिंग से स्वयं भगवान शिव प्रकट हो गए। महादेव ने अपनी हुंकार मात्र से अत्याचारी राक्षस भीम को भस्म कर दिया।
भगवान शिव के इस अद्भुत रूप को देखकर ऋषि-मुनियों और देवताओं ने उनकी स्तुति की तथा लोककल्याण के लिए उसी स्थान पर सदैव निवास करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और वहां ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हो गए। यही ज्योतिर्लिंग आगे चलकर भीमशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
आस्था, संस्कृति और विरासत का संगम
भीमशंकर की यह पौराणिक कथा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी कहानी नहीं है, बल्कि यह धर्म की विजय, अधर्म के विनाश और भक्ति की शक्ति का संदेश भी देती है। मीडिया टूर में शामिल पत्रकारों ने भारतीय संस्कृति की इस समृद्ध परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शिवपुराण के अध्याय 19 से 22 में भीमशंकर ज्योतिर्लिंग की कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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