सहारा जीवन न्यूज 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘जनगणना 2027’ की तैयारियों और प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनगणना में संकलित सभी व्यक्तिगत सूचनाएं पूर्णतः गोपनीय रहेंगी और इनका उपयोग किसी भी प्रकार की जांच या साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता।उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में सम्पन्न होगी। पहले चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना होगी, जबकि दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में कराई जाएगी। इसके पहले 07 मई से 21 मई 2026 के बीच स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प उपलब्ध रहेगा, जिसमें नागरिक ऑनलाइन अपनी जानकारी स्वयं भर सकते हैं।
श्रीमती वर्मा ने स्पष्ट किया कि स्व-गणना वैकल्पिक है, लेकिन इसके बाद प्राप्त SE ID को प्रगणक के साथ साझा करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रगणक निर्धारित अवधि में प्रत्येक घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।उन्होंने जानकारी दी कि इस बड़े कार्य के लिए प्रदेश में करीब 5.25 लाख अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए हैं, जिनमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, चार्ज अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स तथा लगभग 5 लाख प्रगणक एवं पर्यवेक्षक शामिल हैं।उन्होंने बताया कि यह जनगणना देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। नागरिकों की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर 1855 भी जारी किया गया है, जिससे संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी ने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनका उपयोग केवल समेकित रूप में किया जाता है।उत्तर प्रदेश में यह कार्य 75 जिलों, 783 नगरीय निकायों, 350 तहसीलों और लगभग 1.04 लाख गांवों में कराया जाएगा। इसके लिए करीब 3.90 लाख मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं, जहां प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।अंत में उन्होंने मीडिया से अपील की कि जनगणना से जुड़ी जानकारी आम जनता तक पहुंचाएं और नागरिकों को सही व सटीक जानकारी देने के लिए प्रेरित करें, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।







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