महोबा/ अभिनय सिंह
परिवार का भरण-पोषण करने के लिए महिलाओं द्वारा ई रिक्शा चलाए जाने की बात अब जनपद में आम होती चली जा रही हैं। क्योंकि कई महिलाएं अपने परिवार को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए रिक्शा चलाती हैं, खासकर उन स्थितियों में जहां अन्य नौकरी के अवसर सीमित हैं। फिर भी सरकार महिला सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रम महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण देते हैं, जिससे महिलाएं अपना स्वयं रोजगार करके आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। पर अंजुम ने सरकार की तमाम योजनाओं को दरकिनार करके अपने बूते ई रिक्शा लेकर चलना प्रारंभ कर दिया तब कई महिलाओं ने अंजुम को रिक्शा चलते देखकर उनको प्रेरणा स्रोत मानकर कई महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने के लिए ई रिक्शा चलाना प्रारंभ कर दिया है वही मुख्यालय डिग्री कॉलेज की रहने वाली की बेटी अंजुम ने ई-रिक्शा चलाकर परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी संभाल रही है। लोग अंजुम के संघर्ष, साहस व आत्म निर्भरता की मिसाल दे रहे हैं। इस कार्य से अंजुम उन युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं जो स्वरोजगार में लोकलाज की बात कहकर स्वयं को असहाय बताती हैं। वही हम आपको बताते चलें कि आत्मनिर्भर भारत में महिला ई-रिक्शा चालकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कई राज्य सरकारें महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण और सब्सिडी प्रदान कर रही हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें l उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु की महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें सब्सिडी के साथ ऋण भी मिलता है l लेकिन डिग्री कॉलेज की रहने वाली अंजुम ने आत्मनिर्भर बनने के लिए लगातार ई रिक्शा को चलकर संघर्ष कर रही है और महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है l
Author: Harshit Shrivastav
Sahara jeevan newspaper






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