एक्वा टेक पार्क आधुनिक मत्स्य पालन की नई पहचान एक्वा टेक पार्क बना आधुनिक और जलवायु-लचीले मत्स्य पालन का केंद्र

SHARE:

एक्वा टेक पार्क आधुनिक मत्स्य पालन की नई पहचान
एक्वा टेक पार्क बना आधुनिक और जलवायु-लचीले मत्स्य पालन का केंद्र
किसानों,  युवाओं और महिलाओं को मिल रही नई तकनीक व प्रशिक्षण
गुवाहाटी असम। सतत, आधुनिक और जलवायु-लचीले मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की दिशा में कालोंग-कपिली का एक्वा टेक पार्क  असम ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। किसानों, युवाओं और महिलाओं को आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीक से जोड़कर रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पार्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के
भ्रमण के दौरान संस्थान निदेशक ज्योतिष तालुकदार ने बताया कि तकनीक, प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन को गांवों तक पहुंचाकर मत्स्य पालन को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें।”
कालोंग-कपिली की स्थापना 2007 में हुई थी। संगठन पिछले 18 वर्षों से सतत आजीविका, आधुनिक एवं जलवायु-लचीले मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, सामुदायिक विकास तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहा है। संस्था के अनुसार, अब तक एक लाख से अधिक परिवारों तक सहयोग पहुंचाया गया है तथा 60 हजार से अधिक महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल से बना एक्वा टेक पार्क
कालोंग-कपिली के एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल (AFS) को 10 जुलाई 2021 को ICAR-CIFA द्वारा मान्यता मिली थी। इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली पहल बताया गया है। यहां वैज्ञानिक मत्स्य पालन, आधुनिक तकनीक, एकीकृत खेती, उद्यमिता और जलवायु-लचीली पद्धतियों की व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है।
इसी एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल को आगे विकसित करते हुए एक्वा टेक पार्क का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन 12 जुलाई 2025 को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने किया। यह परियोजना NABARD, असम सरकार, ICAR-CIFA, GIZ और SELCO Foundation के सहयोग से विकसित की गई।
प्रशिक्षण से लेकर अनुसंधान और उद्यमिता तक
एक्वा टेक पार्क को मत्स्य पालन के लिए एक एकीकृत वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। यहां प्रशिक्षण, तकनीकी प्रदर्शन, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और क्षमता निर्माण को एक साथ जोड़ा गया है।
पार्क में सतत मत्स्य पालन और प्राकृतिक खेती की प्रदर्शन इकाइयों के साथ प्रशिक्षणार्थियों और आगंतुकों के लिए प्रयोगशाला तथा इंटरनेट सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। साथ ही, किसानों को बेहतर मत्स्य प्रबंधन, आधुनिक उत्पादन तकनीक और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।
महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर
कालोंग-कपिली का विशेष जोर महिला और युवा उद्यमिता पर भी है। संस्था का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को ऐसी आजीविका से जोड़ना है, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकें।
ज्योतिष तालुकदार के अनुसार, “तकनीक, प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन को गांवों तक पहुंचाकर मत्स्य पालन को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और आत्मनिर्भर बनें।”
कालोंग-कपिली को मत्स्य विभाग, असम सरकार के ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। संस्था को 21 नवंबर 2021 को भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ सोसायटी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा संस्था के कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई