
दिव्य प्रेरक कहानयाँ एवं मानवता अनुसंधान केंद्र ट्रस्ट द्वारामलयगिरि आध्यात्मिक चेतना शिविर,प्रसिद्ध भारतीय पावन राज्य केरलम में डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता पी.बी.कालेज) वरिष्ठ साहित्यकार-समाजसेवी को वहाँ “भारतीय भाषा संस्कृति रत्न सम्मान-2026” से अलंकृत कर समारोह पूर्वक शिक्षा,साहित्य और समाज को उनके द्वारा दिए जा रहे विशेष योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

इस उपलब्धि से न सिर्फ डॉ.श्रीवास्तव का सम्मान और गौरव बढ़ा बल्कि जनपद प्रतापगढ़ भी गौरवान्वित महसूस करता है। इस गौरवशाली विशेष उपलब्धि की सूचना पर परिवार,इष्टमित्र एवं शिक्षक,समाजसेवी सभी उन्हें अपनी फोन/व्हाट्सएप पर अपनी बधाइयाँ प्रेषित कर हर्ष व्यक्त कर रहे हैं।

पर्वत श्रृंखला क्षेत्र रामायण कालीन त्रेता युग की पावन वसुंधरा कृष्कृंधा साम्राज्य के राजा बली अंतर्गत,केरल प्रांत के पलक्कड़ जिले स्थित एसएमएसएफ स्प्रिचुअल रिट्रीट सेंटर,मलझपुरम के शांत परिवेश एवं वातावरण के विशाल वन क्षेत्र में संचालित {उत्कृष्ठ हार्टफुलनेस आत्म उत्कर्ष ध्यान/योग/मेडिटेशन-रिट्रीट केंद्र} उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत संस्कृति मिलन समारोह-केरल में संत सुधीर दास जी महाराज-अयोध्या (श्रीरामचरित मानस एवं श्रीमद्भागवत कथा के प्रकांड विद्वान) तथा निदेशक शोध एवं विकास प्रोफेसर डॉ.अजीत कुमार जैन -आगरा (वैदिक सनातन धर्म संस्कृति एवं विभिन्न रामायण के और धर्म शास्त्र के प्रकांड विद्वान) और दिव्य प्रेरक कहानयाँ एवं मानवता अनुसंधान केंद्र ट्रस्ट ठेकमा उ.प्र.सहित जयहिंद तेंदुआ, औरंगाबाद-बिहार के प्रबंध निदेशक श्रीमान डॉ.अभिषेक कुमार जी के संयुक्त शुभ कर कमलों द्वारा देश विदेश और अठारह भारतीय राज्यों से यहाँ चार दिवसीय आवासीय आध्यात्म,योगा एवं मेडिटेशन तथा सम्मान समारोह हेतु सैकड़ों लोगों में से चुने गए केवल 65 सेवारत/रिटायर्ड शिक्षकों,वरिष्ठ साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को विद्वत पैनल द्वारा चयनित किया गया,जिसमें प्रतापगढ़ जनपद से डॉ.विनय का चयन किया गया। इन्हें “इंटरनेशनल मल्टीपल डिसिप्लिनरी सेमिनार इन ज्वाइंट कोलैबोरेशन ऑफ “ग्लोबल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी-यूएसए” एंड “इंडियन लैंगुएज कोऑर्डिनेशन एंड हेल्प काउंसिल” तथाभारतीय भाषा संस्कृति रत्न सम्मान-2026″ और “मलयगिरि आध्यात्मिक चेतना शिविर-2026″ का उपरोक्त प्रमाण-पत्र एवं सम्मान-पत्र तथा अंग वस्त्र,नारियल एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर समारोह पूर्वक सम्मानित किया गया। इसी के साथ ह्यूमैनिटी के विभिन्न विशाल क्षेत्रों में से किसी एक में अपना शोध प्रबंध पूर्ण कर चुके 7 विद्वानों/शिक्षकों को “डॉक्टरेट की मानद उपाधि” प्रदान कर उन्हें गौरवान्वित किया गया।

केरल की धरती पर उत्तर भारत और दक्षिण भारत के विशाल सांस्कृतिक,साहित्यिक,शैक्षिक एवं सामाजिक मिलन का एक ऐतिहासिक महाकुम्भ अत्यंत सराहनीय,प्रशंसनीय,अतुलनीय तो था ही था यह लोगों को अच्छा कार्य करने,समाज कल्याण तथा मानवता के क्षेत्र में उत्तरोत्तर उन्नति प्रगति के लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणादायक महा सफल विशाल गौरवशाली आयोजन सिद्ध हुआ। जंगल में मंगल कर देने जैसी ऐतिहासिक सफलता के लिए इन उपरोक्त तीनों ही उच्च संस्थाओं के संचालकों/निदेशकों तथा दिव्य प्रेरक कहानयाँ एवं मानवता अनुसंधान केंद्र ट्रस्ट के प्रधान/प्रबंध निदेशक डॉ.अभिषेक कुमार जी एवं उनकी संपूर्ण टीम को लख लख बधाईयाँ और अशेष मंगल शुभकामनाएँ व दिली आशीर्वाद।





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