एरी सिल्क स्पिनिंग मिल में रेशम के धागे बनाने की प्रक्रिया से रूबरू हुए पत्रकार
सहारा जीवन न्यूज़

बक्सा, असम। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत असम के बक्सा जिले के खरुआ स्थित एरी सिल्क स्पिनिंग मिल का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान दूरदर्शन के डिप्टी डायरेक्टर अंकुर लाखौरी तथा एरी सिल्क स्पिनिंग मिल के डिप्टी मैनेजर धीरेंद्र ठाकुरिया मौजूद रहे।

उन्होंने एरी रेशम से धागे तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी।
श्री धीरेन ठाकुरिया ने बताया कि एरी सिल्क से उच्च गुणवत्ता वाले रेशमी धागे तैयार किए जाते हैं। मिल में रेशम को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजारने के बाद उसकी कताई की जाती है और इसके बाद उसे बारीक एवं मजबूत रेशमी धागे के रूप में तैयार किया जाता है। भ्रमण के दौरान अतिथियों ने धागे तैयार किए जाने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा और एरी सिल्क उत्पादन से जुड़ी तकनीक की जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने बताया कि एरी सिल्क असम और पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण पारंपरिक रेशम कला का हिस्सा है। इससे तैयार होने वाले वस्त्र अपनी गुणवत्ता, मजबूती और प्राकृतिक विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। एरी सिल्क उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की पारंपरिक विरासत को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।एरी सिल्क स्पिनिंग मिल की उत्पादन क्षमता 2625 किलोग्राम बताई गई। वर्तमान में मिल में 44 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग आधे कर्मचारी महिलाएं हैं। इससे महिलाओं को रोजगार और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी मिल रहे हैं।प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में पूरे भारत से एरी सिल्क का अनुमानित निर्यात करीब 500 मीट्रिक टन, जिसकी अनुमानित कीमत 230 करोड़ रुपये रही। वहीं मूगा सिल्क का निर्यात करीब 50 मीट्रिक टन, जिसकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये बताई गई है।इस प्रकार वर्ष 2025-26 में एरी और मूगा सिल्क का कुल अनुमानित निर्यात मूल्य करीब 330 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसी अवधि में भारत का कुल सिल्क निर्यात मूल्य 3,578.76 करोड़ रुपये रहा। ये आंकड़े भारतीय रेशम उद्योग में एरी और मूगा सिल्क की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
भ्रमण के दौरान पत्रकारों और अतिथियों ने एरी सिल्क के उत्पादन, रोजगार तथा निर्यात की संभावनाओं को समझा। इस अवसर पर पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक रेशम कला, आधुनिक उत्पादन प्रक्रिया और स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी गई।
भ्रमण के दौरान पत्रकारों और अतिथियों ने एरी सिल्क के उत्पादन, रोजगार तथा निर्यात की संभावनाओं को समझा। इस अवसर पर पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक रेशम कला, आधुनिक उत्पादन प्रक्रिया और स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी गई।







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