
लखनऊ। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSO) के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक सोमवार को लखनऊ में शुरू हुई। “परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी” विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों सहित 350 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
कार्यक्रम का आयोजन “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” विषय के अंतर्गत किया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों को आधुनिक बनाना, डेटा की गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के प्रधान सचिव आलोक कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके बाद सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव तथा ब्रिक्स 2026 सांख्यिकी ट्रैक के अध्यक्ष डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, प्रशासनिक डेटा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रभावी उपयोग तथा डेटा प्रबंधन और गोपनीयता मानकों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से डेटा अंतराल कम होंगे और भविष्य के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणालियों का निर्माण होगा।
बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों का परिचय देते हुए आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतिनिधियों ने ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सांख्यिकीय नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (JSP) 2026 के मसौदे और उसके संक्षिप्त संस्करण का भी विमोचन किया गया। सदस्य देशों से प्राप्त सुझावों को सहमति के आधार पर अंतिम संस्करण में शामिल किया जाएगा।
पहले तकनीकी सत्र “डिजिटल प्लेटफॉर्म से क्रियान्वयन स्तर तक: डेटा प्रसार के लिए राष्ट्रीय पद्धतियां और रणनीतिक दृष्टिकोण” में भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई ने अपने अनुभव साझा किए। वहीं दूसरे तकनीकी सत्र “सांख्यिकीय प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार” में भारत, इथियोपिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई ने सांख्यिकीय प्रणालियों के आधुनिकीकरण से जुड़े सुधारों और नवाचारों पर प्रकाश डाला।
इसके अतिरिक्त “प्रशासनिक डेटा की क्षमता को उजागर करना” विषय पर आयोजित सह-कार्यक्रम में प्रशासनिक डेटा को अधिक सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आधिकारिक आंकड़ों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बताया गया। विशेषज्ञों ने अंतरसंचालनीय डेटा प्रणालियों, मानकीकृत मेटाडेटा और सरकार, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों, शिक्षाविदों तथा तकनीकी भागीदारों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग को नई दिशा देना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मजबूत एवं विश्वसनीय डेटा इकोसिस्टम तैयार करना है।







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