गांधीवादी विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे डॉ. संजीत कुमार
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक के रूप में युवाओं और विद्यार्थियों को सत्य, अहिंसा, सेवा व सद्भाव के मूल्यों से जोड़ने की पहल
नई दिल्ली/बिलासपुर। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (GSDS), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. संजीत कुमार महात्मा गांधी के विचारों और जीवन मूल्यों को विशेष रूप से युवा पीढ़ी एवं विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रशासन, प्रबंधन, मानव संसाधन और सामाजिक क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले डॉ. कुमार विभिन्न कार्यक्रमों एवं शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से गांधीवादी मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़े हुए हैं।
डॉ. संजीत कुमार को भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में प्रशासनिक और संस्थागत कार्यों का व्यापक अनुभव प्राप्त है। प्रशासन एवं प्रबंधन के साथ ही मानव संसाधन, सामाजिक सरोकार और जन-जागरूकता से जुड़े क्षेत्रों में भी उन्होंने कार्य किया है।
बहुआयामी है शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डॉ. कुमार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी विविधतापूर्ण रही है। उन्होंने एम.ए. हिंदी, एम.ए. अंग्रेजी, एम.बी.ए. (ह्यूमन रिसोर्स/एचआर), बी.ए. राजनीति विज्ञान और एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने पर्सनल मैनेजमेंट एवं इंडस्ट्रियल रिलेशन में पीजी डिप्लोमा किया है तथा प्रबंधन के क्षेत्र में पीएच.डी. की उपाधि भी प्राप्त की है।
युवाओं को गांधी के विचारों से जोड़ने पर जोर
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक के रूप में डॉ. संजीत कुमार महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन, सेवा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को समाज, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, शैक्षणिक गतिविधियों, प्रतियोगिताओं, संवाद कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनके नेतृत्व में समिति द्वारा युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं की सहभागिता से कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य गांधी के विचारों को केवल इतिहास तक सीमित न रखते हुए उन्हें वर्तमान पीढ़ी के जीवन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ना है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से है जुड़ाव
डॉ. संजीत कुमार का मूल निवास घर मंदिर चौक, ओमनगर, जरहाभाटा, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ है। राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण संस्था में निदेशक के रूप में दायित्व निभाते हुए उनका छत्तीसगढ़ से जुड़ाव प्रदेश के लिए भी उल्लेखनीय है।





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