
जनता पार्टी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में बनाई अलग पहचान
अमेठी/लखनऊ। गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे वरिष्ठ भाजपा नेता तेजभान सिंह (दादा) के निधन के साथ ही सुल्तानपुर-अमेठी की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। वे केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं थे, बल्कि संघर्ष, संगठन और जनसेवा की ऐसी मिसाल थे, जिनकी राजनीतिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
तेजभान सिंह अमेठी जनपद की गौरीगंज तहसील के जामों विकासखंड स्थित अचलपुर गांव के निवासी थे। उन्होंने वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद 1991, 1993 और 1996 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में लगातार तीन बार गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उस दौर में, जब अमेठी को कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता था, तब तेजभान सिंह भाजपा के सबसे मजबूत और भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते थे।
तेजभान सिंह के राजनीतिक जीवन की सबसे चर्चित घटनाओं में वर्ष 1991 का विधानसभा चुनाव शामिल है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतगणना एक साथ चल रही थी। सुल्तानपुर लोकसभा की पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन गौरीगंज की मतगणना के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
बताया जाता है कि अंतिम चरण की मतगणना से पहले पुनर्मतगणना कराने का दबाव बनाया जा रहा था। उस समय गौरीगंज सीट पर भाजपा प्रत्याशी तेजभान सिंह बढ़त पर थे और बचे हुए मतों के आधार पर उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मतगणना प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी और किसी भी प्रकार की अनियमितता का विरोध किया।
तत्कालीन एसडीएम भगेलू राम ने पुनर्मतगणना की मांग को अस्वीकार करते हुए निष्पक्ष तरीके से अंतिम चरण की मतगणना जारी रखने का निर्णय लिया। अंततः मतगणना पूरी होने पर तेजभान सिंह 189 मतों से विजयी घोषित हुए।







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