ग्रामीण पुस्तकालयों को ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करें: संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह

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सहारा जीवन न्यूज़


वाराणसी। ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों को ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने और उनके प्रभावी संचालन के लिए सरकार तथा समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। ज्ञान की उपयोगिता व्यापक है और पुस्तकालय शिक्षा, संस्कार एवं व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यह विचार संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान, कोलकाता और उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तकालय प्रभारियों की प्रशिक्षण कार्यशाला में व्यक्त किए।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए दिनेश सिंह ने कहा कि ग्रामीण पुस्तकालयों का संचालन एक चुनौती है, जिसे सामूहिक प्रयासों से सफल बनाया जा सकता है। आज बच्चे और युवा मोबाइल, लैपटॉप तथा कंप्यूटर की संस्कृति में उलझते जा रहे हैं। ऐसे में कंप्यूटर, मोबाइल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग विवेकपूर्ण एवं समझदारी से करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ अच्छे विद्यालय, पुस्तकालय और स्वास्थ्य केंद्र विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पुस्तकें मानव की सर्वोत्तम मित्र हैं। माता-पिता का दायित्व है कि वे स्वयं भी पुस्तकें पढ़ें, तभी बच्चों और युवाओं को टेलीविजन तथा मोबाइल से दूर कर पुस्तकों के प्रति आकर्षित किया जा सकेगा।पुस्तकालय विज्ञान और सामाजिक सहभागिता पर जोर
प्रशिक्षण कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद जैन, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, वाराणसी के पुस्तकालयाध्यक्ष राजेश कुमार मिश्र तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. विजय प्रकाश सिंह ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के सिद्धांतों, स्थानीय आवश्यकताओं और सामाजिक सहभागिता के आधार पर ग्रामीण पुस्तकालयों के संचालन पर बल दिया।लखनऊ से आए अनंत शुक्ला एवं आलोक शुक्ला ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से पुस्तकालयों के प्रभावी संचालन और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. भोलेंद्र कुमार सिंह ने पुस्तकालय संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान करते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।कार्यक्रम के आयोजक एवं संचालक राजकीय जिला पुस्तकालय, वाराणसी की पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार ने ग्रामीण पुस्तकालयों की स्थापना, उपलब्ध कराई गई सामग्री और सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रबल इच्छाशक्ति हो तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि राजकीय जिला पुस्तकालय, वाराणसी में 3300 से अधिक बच्चे आजीवन सदस्य हैं। पुस्तकालय सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक खुला रहता है। यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में मदद मिल रही है। जिलाधिकारी के प्रयास से यहां मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का केंद्र विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।क्वींस इंटर कॉलेज, वाराणसी के प्रधानाचार्य विश्वेश्वर सिंह ने अपने विद्यालय में विकसित पुस्तकालय एवं एआई सेंटर की कार्यप्रणाली और सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी राकेश यादव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में एडीओ पंचायत, पंचायत सचिवों और विभिन्न पुस्तकालयों के प्रभारियों ने प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक अनुराग मिश्र तथा सहायक निदेशक, संस्कृत पाठशाला परमानंद सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय एवं पुस्तकालय के कर्मचारियों ने सहयोग प्रदान किया।

Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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