राजेश निगम की खास रिपोर्ट
कानपुर, 31 अक्टूबर 2026:
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता और चिकित्सकीय ज्ञान के आदान-प्रदान के उद्देश्य से ISOPARB (इंडियन सोसायटी फॉर स्टडी ऑफ रिप्रोडक्शन एंड फर्टिलाइजर्स, कानपुर चैप्टर) के तत्वावधान में शनिवार को होटल रीजेंटा में एक भव्य वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य केंद्र महिलाओं में बार-बार होने वाले मूत्रमार्ग संक्रमण (Recurrent UTI) और शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के दौरान एवं पश्चात होने वाले संक्रमण (Surgical Site Infection) की रोकथाम व प्रभावी उपचार रहा।
नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों पर विशेष जोर
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए ISOPARB कानपुर की अध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य चिकित्सकों को संक्रमण की समय पर पहचान, रोकथाम और उसके प्रभावी उपचार के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों से अवगत कराना है।
संगोष्ठी के दौरान डॉ. राशि मिश्रा ने ‘Recurrent UTI’ पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने इसके मुख्य कारणों, बार-बार संक्रमण होने की परिस्थितियों, इससे उत्पन्न होने वाली जटिलताओं और इसके स्थायी उपचार पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विशेष पैनल चर्चा और सावधानियां
पैट्रन डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने बताया कि कार्यक्रम में ‘Surgical Site Infection’ की रोकथाम को लेकर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में संक्रमण के शुरुआती लक्षणों की पहचान, ऑपरेशन के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों और सर्जरी के बाद बेहतर देखभाल जैसे गंभीर विषयों पर मंथन किया गया। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. रेनू गुप्ता लाल एवं डॉ. पाविका लाल द्वारा किया गया।
प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर शहर के कई वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और चिकित्सक उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
डॉ. नीलम मिश्रा (अध्यक्ष)
डॉ. मीरा अग्निहोत्री (पैट्रन)
डॉ. किरण सिन्हा (सचिव)
डॉ. रेशमा निगम (वित्त सचिव)
की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
चिकित्सकीय प्रोटोकॉल अपनाने का आह्वान
सचिव डॉ. किरण सिन्हा ने संगोष्ठी के निष्कर्षों पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं में बार-बार होने वाले संक्रमण की समय पर पहचान और सर्जरी के दौरान संक्रमण की रोकथाम के लिए निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को जागरूक करने के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में और अधिक सुधार लाना था।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित चिकित्सकों ने वैज्ञानिक चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई तथा अपने-अपने नैदानिक अनुभव एवं विचार आपस में साझा किए।
*सहारा जीवन न्यूज से राजेश निगम की खास रिपोर्ट*



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