पुणे में राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘ग्रहणी’ रोग पर गहन मंथन गट-ब्रेन संबंध

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अनियमित दिनचर्या और आयुर्वेदिक जीवनशैली पर डॉ. अनूप तिवारी ने रखे महत्वपूर्ण विचार
सहारा जीवन न्यूज़
पुणे (महाराष्ट्र)। आत्रेय रंगमंदिर, पुणे में 6 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में ‘ग्रहणी मंथन’ विषय पर देशभर से जुटे आयुर्वेद विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं, गट-ब्रेन संबंध, बदलती जीवनशैली और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
राष्ट्रीय सम्मेलन में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (NIMA) के आयुर्वेद डिवीजन के उपाध्यक्ष डॉ. अनूप कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘ग्रहणी’ रोग और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान और बदलती जीवनशैली के कारण बड़ी संख्या में लोग पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कब्ज, दस्त, अपच तथा नींद से जुड़ी परेशानियों को लेकर भी लोगों में लगातार जागरूकता की आवश्यकता है। डॉ. तिवारी ने गट और ब्रेन के बीच संबंध को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शरीर के पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध माना जाता है। उन्होंने आयुर्वेद में बताई गई दिनचर्या एवं रात्रिचर्या के पालन पर जोर देते हुए कहा कि समय पर सोना, भोजन का समय निर्धारित रखना तथा अपनी जीवनशैली को व्यवस्थित रखना स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। आज के दौर में बच्चों के खान-पान को लेकर अभिभावकों को विशेष रूप से सजग होने की जरूरत है। फास्ट फूड को आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा मानने के बजाय बच्चों को पौष्टिक, संतुलित और प्राकृतिक भोजन की आदत डालना जरूरी है।डॉ. तिवारी ने कहा कि यदि व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीना चाहता है तो उसे अपनी दिनचर्या, खान-पान, नींद और जीवनशैली पर ध्यान देना होगा। उन्होंने लोगों से आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए आयुर्वेद चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों ने चिकित्सा पद्धति में शोध, आयुर्वेद के विकास, आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न स्वास्थ्य चुनौतियों तथा आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आशुतोष कुलकर्णी, सेंट्रल काउंसिल के अध्यक्ष एवं डी.वाई. पाटिल यूनिवर्सिटी के कुलपति, डॉ. जे.एन. पवार तथा डॉ. मजहब आलम, सदस्य, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM), की भी प्रमुख उपस्थिति रही।कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीलेश लोंढे ने सम्मेलन में उपस्थित सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपयोगिता, स्वस्थ जीवनशैली तथा बदलते दौर में आयुर्वेद की भूमिका को लेकर सार्थक चर्चा हुई।

Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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