रिपोर्ट – मोहम्मद असलम | लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील एक बार फिर बाढ़ के खतरे से जूझने के कगार पर खड़ी है। बाढ़ से बचाव को लेकर शुरू की गई 22 करोड़ 23 लाख रुपये की परियोजना अब तक अधूरी है, जबकि मानसून की आहट तेज हो चुकी है।
इस परियोजना की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरीक्षण के बाद हुई थी। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक रोमी साहनी ने भी निगरानी की, वहीं हाल ही में लखनऊ मंडल की आयुक्त रोशन जैकब ने भी मौके का मुआयना कर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि “मानसून से पहले कार्य पूरा हो जाना चाहिए।”
बचाव कार्यों में देरी, किसानों में नाराज़गी
बाढ़ खंड विभाग का दावा है कि परियोजना का 70% कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की मानें तो वास्तविकता इससे काफी पीछे है। उनका कहना है कि महज़ 50% काम हुआ है और वो भी धीमी गति से। किसानों ने इस देरी पर नाराज़गी जताते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्य नहीं पूरा हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे।
राजनीतिक सवालों की बौछार – सरकार घिरी
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रेहान खान ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा:
> “मानसून दरवाजे पर है, मगर सरकार अभी भी फाइलों और दावों में उलझी है। 22 करोड़ खर्च हो रहे हैं लेकिन धरातल पर नतीजा शून्य है। मुख्यमंत्री आए, मंत्री आए, विधायक की निगरानी रही, लेकिन काम की गति और गुणवत्ता दोनों पर सवाल हैं। यह केवल दिखावे की परियोजना बनकर रह गई है।”
उन्होंने यह भी मांग की कि परियोजना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सामने लाया जाए कि अब तक खर्च की गई राशि कहां और कैसे इस्तेमाल हुई।
पलिया की उम्मीदें अब प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर
पलिया की जनता की निगाहें अब शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ बाढ़ का नहीं, बल्कि भरोसे का है। क्या इस बार वादे निभाए जाएंगे, या एक बार फिर उम्मीदें पानी में बह जाएंगी? ये सवाल अब हर किसान, हर ग्रामीण के मन में है
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Author: Harshit Shrivastav
Sahara jeevan newspaper





