महोबा।/अभिनय सिंह
नौतपा की भीषण और देह जलाने वाली गर्मी के साथ बिजली की आंख मिचौनी के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चरखारी में जनरेटर के लिए डीजल उपलब्ध न होने के कारण मरीजों की हालत खराब है। जनन सुरक्षा केन्द्र के अलावा पूरे अस्पताल में जनरेटर की सप्लाई न मिलने से मरीज परेशान हैं वहीं अधीक्षक का कहना है कि फरवरी से डीजल की लिमिट जारी न होने के कारण जनरेटर शो पीस बने हुए हैं।
नौपता के दौरान इस बार भले ही टेम्परेजचर 40 के नीचे हो लेकिन गर्मी की तपिश 45 डिग्री पार किए है और आमजनमानस भीषण गर्मी से हलाकान है लेकिन सबसे बुरी दशा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चरखारी की है जहां जनरेटर का प्रयोग किए जाने से मरीज बिल बिलाते घूम रहे हैं। चिकित्साधीक्षक से लेकर सभी चिकित्सकों के रूम में चरखारी विधायक डॉ़ बृजभूषण राजपूत ने एसी लगवाई हैं लेकिन एसी का लाभ मरीजों को नहीं मिलता है। अस्पताल के वार्डों में भीषण गर्मी बिजली की आंख मिचौनी तथा दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों की दशा को देखने पहुंचे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रान्तीय नेता पवन कुशवाहा द्वारा जब अस्पताल के जरनेटर चलाने की मांग की गयी तो चिकित्साधीक्षक डॉ. पी.के. सिंह ने बताया कि फरवरी माह से अस्पताल के जनरेटर के लिए डीजल की लिमिट जारी नहीं हो पायी है जिसके कारण जनरेटर ठप्प पड़े हैं। डीजल लिमिट जारी किए जाने के संबंध में उच्चाधिकारियेां से कब मांग की गयी इसका जवाब चिकित्साधीक्षक नही दे सके और उनका कहना है कि डीजल की लिमिट प्रदेश स्तर से जारी होती है इसमे पत्राचार की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसी दशा में एसी रूम में बैठे चिकित्सकों के ऊपर भले ही बिजली की आंख मिचौनी का प्रभाव न हो लेकिन आम मरीज विभिन्न वार्डों में बुरी तरह से पसीना पसीना हो रहा है। चिकित्साधीक ने बताया कि अभी जननी सुरक्षा के लिए लिमिट जारी हुई है और कामचलाऊ जनरेटर से जननी सुरक्षा को सप्लाई दी जा रही है। अब जहां तक अस्पताल के दावों और मौके की हकीकत को देखा जाए तो बड़ा घालमेल नजर आता है जहां अस्पताल में कहने को तो दो बड़े जनरेटर हैं लेकिन दोनों ही जनरेटर सालों से इस्तेमाल ही नहीं हुए हैं यहां तक कि जनरेटर रूम का सवाल है तो वह कभी खुलता ही नहीं हैं और जनरेटर व रूम धूल से पटा पड़ा है जिससे फरवरी तक जनरेटर चलने का दावा खोखला नजर आता है। एबीवीपी नेता ने कहा कि अस्पताल में तेल का खेल हो रहा है और इसकी जांच वह कराएंगे ताकि मरीजों को मिलने वाली सुविधा का बन्दरबांट न होने पाए।
Author: Harshit Shrivastav
Sahara jeevan newspaper





