वाराणसी :
हिंदी पत्रकारिता सप्ताह के अवसर पर पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) वाराणसी चैप्टर एवं बनारस रेल कारखाना (बरेका) के जनसंपर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्र एवं मीडिया” विषय पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा तथा वरिष्ठ साहित्यकार एवं जनसंपर्क विशेषज्ञ डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ की बहुप्रतीक्षित 17वीं पुस्तक ‘शिखर: विविध आलेख’ का लोकार्पण समारोह कीर्ति कक्ष, बरेका में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि व सम्मानजनक उपस्थिति
इस गरिमामयी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे प्रो. राम मोहन पाठक, पूर्व कुलपति, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी, बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार एवं अन्य अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति रही।
PRSI वाराणसी चैप्टर के चेयरमैन अनिल जजोदिया ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए सभी अतिथियों का हृदयतल से स्वागत एवं अभिनंदन किया। समारोह की शुरुआत अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित करने के साथ हुई।
पुस्तक का परिचय और विमोचन
पुस्तक के लेखक डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’, जो एनटीपीसी के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी भी रह चुके हैं, ने अपनी पुस्तक की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस सत्रहवीं कृति में विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक व राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित कुल 17 आलेख शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से प्रथम आलेख “राष्ट्र एवं मीडिया” का उल्लेख करते हुए बताया कि यह आलेख लगभग 18 पृष्ठों में राष्ट्र और मीडिया के गहन संबंधों को दर्शाता है।
विचारगोष्ठी: मीडिया की भूमिका पर विमर्श
मुख्य अतिथि प्रो. राम मोहन पाठक ने अपने वक्तव्य में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका, राष्ट्रीय चेतना और जनभावनाओं के संबंध में सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र का मूल आधार लोक की भावना है, और मीडिया इसका संवाहक है।”
हास्य कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी ने अपनी विशिष्ट शैली में वर्तमान मीडिया पर व्यंग्य करते हुए कहा, “पहले समाचार छपता था, फिर बिकता था; अब समाचार बिकता है, तब छपता है।” इस वक्तव्य ने सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया।
राजेश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, बरेका ने विमोचित पुस्तक के कुछ विचारोत्तेजक अंशों का पाठ करते हुए मीडिया की भूमिका को केवल सूचना प्रदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सजग प्रहरी बनने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट जनों के विचार और सहभागिता
परिचर्चा में शामिल अन्य प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे:
नरेंद्र मेहता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, PRSI
प्रो. अनुराग दवे, पूर्व विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, बीएचयू
डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान, नागरिक पीजी कॉलेज, जंघई
ओम प्रकाश त्रिपाठी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक
राकेश शरण मिश्र ‘गुरु’, संयोजक, सोन साहित्य संगम, सोनभद्र
चंद्रप्रकाश सिंह, फाउंडर डायरेक्टर, आन्या ग्रीन एनर्जी
डॉ. ममता, प्रवक्ता, धीरेन्द्र महिला पीजी कॉलेज
डीएसएल श्रीवास्तव, पूर्व उप प्रबंधक, एनटीपीसी
डॉ. महेश, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ
भरत गुप्ता, डायरेक्टर, क्रिएटिव मीडिया
रूपेश नागवंशी, समाजसेवी
सभी वक्ताओं ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए मीडिया की जिम्मेदारियों, चुनौतियों और नई पीढ़ी की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
कार्यक्रम संचालन एवं समापन
कार्यक्रम का सफल संयोजन PRSI के सचिव प्रदीप कुमार उपाध्याय द्वारा किया गया। संचालन की भूमिका काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रवक्ता डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने निभाई, जबकि डॉ. मनोहर लाल द्वारा सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया गया
यह आयोजन साहित्य, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क के त्रिवेणी संगम का एक अनुपम उदाहरण रहा। कार्यक्रम में मीडिया की बदलती भूमिका, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक संरचना में उसकी प्रभावशीलता पर व्यापक विमर्श हुआ, जो निश्चित ही हिंदी पत्रकारिता के भविष्य को एक सकारात्मक दिशा देगा।
Author: Harshit Shrivastav
Sahara jeevan newspaper





