सहारा जीवन न्यूज
लंका से हनुमान के फेंकने पर स्वयं विराजित आज भी यहां पर शनि देव के गिरने का निशान
पंकज पाराशर छतरपुर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर शहर से 18 किलोमीटर दूर मुरैना जिले के ग्राम एंती में बना शनि मंदिर कई मामलों में काफी अलग है। मंदिर का नाम है शनिश्चरा धाम। इसका इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यह देश के सबसे प्राचीनतम शनि मंदिरों में से एक माना जाता है। शनिदेव के यहां विराजित होने के कारण इस जगह को बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां लोग शनि को तेल चढ़ाने के बाद उन्हें गले लगाते हैं।स्थानीय कथाओं के अनुसार, रावण ने शनिदेव को भी कैद कर रखा था। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने वहां पर शनिदेव को रावण की कैद में देखा। भगवान हनुमान को देख शनिदेव ने उनसे यहां से आजाद करने की विनती की। शनिदेव के कहने पर भगवान हनुमान नो उन्हें लंका से कहीं दूर फेंक दिया, ताकि शनिदेव किसी सुरक्षित जगह पर जा सकें। हनुमान जी द्वारा लंका से फेंके जाने पर शनिदेव इस क्षेत्र में आकर प्रतिष्ठित हो गए और तब से यह क्षेत्र शनि क्षेत्र के नाम से विख्यात हो गया।





