अशोक श्रीवास्तव अमेठी
अमेठी। जिले में निजी अस्पतालों की जांच की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसान मजदूर सेवा संस्थान द्वारा दुर्गापुर रोड स्थित धर्मार्थ चिकित्सालय में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सीएमओ से की गई थी। शिकायत के बाद सीएमओ ने एक बार फिर वही दो डॉक्टर—डॉ. राम प्रसाद और डॉ. पी.के. उपाध्याय—को ही जांच का जिम्मा सौंप दिया।
“जांच का तरीका देखकर उठे सवाल”
दोनों डॉक्टर अस्पताल पहुंचे और मरीजों की सुविधा, पैथोलॉजी, मेडिकल स्टोर, एम्बुलेंस तथा स्टाफ की योग्यता की जांच शुरू की लेकिन जांच की गंभीरता मौके पर दिखाई नहीं दी। गैर-गंभीर रवैया देखकर मौजूद लोगों ने कहा—ये जांच सिर्फ दिखावा लग रही है।
जिन डॉक्टरों को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी, वे अस्पताल संचालक से लगातार मुस्कुराते हुए बातचीत कर रहे थे। इससे लोगों में यह धारणा बनी कि जांच खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं है।
“झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे चल रहा अस्पताल?”
शिकायतकर्ता संगठन का आरोप है कि अस्पताल में अयोग्य और अपंजीकृत स्टाफ, बिना मान्यता की सेवाएं, इलाज के नाम पर भारी भरकम वसूली और जिन डॉक्टरों के नाम बोर्ड पर लिखे हैं, लेकिन वे कभी मरीज देखने नहीं आते। इन सभी के बावजूद जांच का माहौल बेहद हल्का दिखाई दिया।
“जांचकर्ताओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल”
अमेठी में बीते कई महीनों से जहां भी किसी अस्पताल, नर्सिंग होम या संस्था पर कार्रवाई हुई, लगभग हर मामले में इन्हीं दो डॉक्टरों को जांच अधिकारी बनाया गया है:
1. संजय गांधी अस्पताल, मुंशीगंज — महिला की मौत पर हंगामा हुआ, जांच इन्हीं दो डॉक्टरों को दी गई।
2. सीएचसी अमेठी में प्रसूता की मौत — जांच फिर इन्हीं के हवाले।
3. जगदीशपुर के निजी नर्सिंग होम में मौत — जांचकर्ता वही दो डॉक्टर।
4. अंतू रोड पर फर्जी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट — जांच फिर वही टीम।
5. अब दुर्गापुर रोड का धर्मार्थ चिकित्सालय — जांचकर्ता वही दो डॉक्टर।
लेकिन इन सभी मामलों में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कई मामलों में रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई—सब कुछ गोलमोल होकर रह गया।
किसान मजदूर सेवा संस्थान के अध्यक्ष का कहना है— हमने कई गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की है। अगर जांच लीपापोती में बदल गई तो हम सीएमओ कार्यालय पर धरना देंगे। तो वहीं जांच अधिकारी डॉ. राम प्रसाद ने कहा कि जांच जारी है, अनियमितता पाई गई तो कार्रवाई होगी लेकिन पिछले अनुभवों के आधार पर लोगों में यह भरोसा नहीं बन पा रहा कि परिणाम सामने आएंगे
Author: Ashok Srivastava
Amethi




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