अशोक श्रीवास्तव अमेठी
अमेठी। मिशन शक्ति अभियान के तहत जनपद के जायस के मुहल्ला कुष्ठ आश्रम परिसर में अमेठी महिला स्वैच्छिक समिति एवं सहारा जीवन जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में बाल विवाह, दहेज और बाल श्रम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चाइल्ड लाइन केस वर्कर रुचि सिंह ने बताया कि बाल विवाह का मतलब 18 वर्ष से कम उम्र के लड़के या लड़की के विवाह से है। यह एक हानिकारक और अवैध प्रथा है जिसके शिक्षा और स्वास्थ्य पर नकारात्मक परिणाम होते हैं। भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार, इस तरह के विवाह निषिद्ध हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार, विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। इस कानून के अनुसार, अगर कोई भी साथी इस कानूनी उम्र से कम है, तो उसे बाल विवाह माना जाता है।
प्रबंधक संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि दहेज प्रथा में शादी के दौरान दूल्हे के परिवार को दुल्हन के परिवार की ओर से नकदी, सामान या संपत्ति देना शामिल है। यह एक सामाजिक बुराई है, जो भारत सहित कई देशों में प्रचलित है और अक्सर दुल्हन पर वित्तीय बोझ डालती है। दहेज से संबंधित हिंसा, उत्पीड़न और यहां तक कि हत्याएं भी होती हैं।
समाजसेविका एवं सचिव नीरज पांडेय ने बताया कि बाल श्रम गरीबी का कारण और परिणाम दोनों है। यह गरीबी के चक्र को बनाए रखता है, क्योंकि यह बच्चों को शिक्षा से दूर रखकर भविष्य में अच्छी नौकरी पाने के अवसरों को भी कम कर देता है। यह गुलामी, तस्करी और शोषण जैसी प्रथाओं का रूप ले सकता है। भारत में, घरेलू कामगार, ढाबे और ईंट भट्टे जैसे क्षेत्रों में बाल श्रम के मामले आम हैं। कार्यक्रम में सोनू प्रधान सभासद सर्वेश,लक्ष्मी जायसवाल मुन्नी देवी प्रतीक त्रिपाठी योगेश कुमार शामिल हुए।
Author: Ashok Srivastava
Amethi




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