हरगाँव (सीतापुर), विकास भारती / उत्तम शर्मा
विकासखंड हरगाँव की ग्राम पंचायत अरमी में मनरेगा योजना के तहत बिना कार्य कराए लाखों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर फर्जी मस्टर रोल तैयार कर, चहेते लोगों के जॉब कार्ड पर भुगतान किया गया है, जबकि वास्तविक श्रमिकों को काम तक नहीं दिया गया।
ऑनलाइन पोर्टल पर भी मिल रहे भ्रष्टाचार के सबूत
21 जून को पोर्टल पर अपलोड की गई कार्य की तस्वीरें मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं। तस्वीरों में कहीं महिलाएं नज़र नहीं आ रहीं, तो कहीं गिनती से अधिक दिख रही हैं। कुछ मस्टर रोल ऐसे भी हैं जिनमें महिलाएं पूरी तरह गायब हैं।
जिम्मेदार मौन, ग्रामीण नाराज़
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से यह भ्रष्टाचार हो रहा है। जब ग्रामीण कार्य मांगते हैं तो उन्हें “कोई कार्य नहीं है” कहकर लौटा दिया जाता है, जबकि सुबह-सुबह चहेते लोगों को बुलाकर मस्टर रोल में हेराफेरी कर ली जाती है।
सरकारी योजनाओं की साख पर सवाल
यह मामला तब सामने आया है जब सरकार खुद मनरेगा जैसे योजनाओं को लेकर “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करती है। एपीओ और खंड विकास अधिकारी की सख्ती के बावजूद यह खेल जारी है, जिससे सवाल उठता है कि आखिर भ्रष्टाचार को संरक्षण कौन दे रहा है?
ग्रामीणों की मांग: सख्त जांच और कार्रवाई
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत अरमी में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह सरकार की छवि को गहरी चोट पहुँचा सकता है।
Author: Harshit Shrivastav
Sahara jeevan newspaper





