सहारा जीवन न्यूज 
अमेठी। अमेठी जलबिरादरी एवं दैनिक सहारा जीवन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय निरीक्षण भवन अमेठी के कमेटी हाल में सामाजिक संरचना में पत्रकारों की भूमिका विषयक संगोष्ठी का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर पूजा अर्चना एवं माल्यार्पण तथा रामकुमारी संस्सृति की वाणी वंदना से हुआ। संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत करते हुए संयोजक संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता के मूल में जिज्ञासा होती है,जो सरकारी योजनाओं को समाज के पास पहुंचाने का कार्य करती है।पत्रकार समाज को आइना दिखाने का काम करता है।विषय का प्रवर्तन करते हुए अम्बरीष मिश्र ने कहा कि समाजिक सरोकारों में पत्रकार एक सेतु का काम करता है।ब्रेकिंग न्यूज एवं भ्रामक समाचारों से समाज को बचने की जरूरत है।पत्रकार इतिहास को गढ़ने का कार्य करता है।
अध्यक्षता करते हुए ब्यूरोचीफ दिलीप सिंह ने कहा कि ईमानदारी से लिखी खबर खबर होती है।एक पत्रकार को सत्यनिष्ठ,विश्वसनीय एवं को निर्भीक होकर लेखनी चलाना चाहिए। पत्रकारों को चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना चाहिए।मुख्य अतिथि चिन्ता मणि मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की पत्रकारिता क्षीण होती जा रही है।समय के साथ पत्रकारों को सचेष्ट होकर तथ्यात्मक खबर लिखने पर बल देते की जरूरत है।सही मायने में पत्रकार समाज का प्रतिबिम्ब होता है।विशिष्ट अतिथि डॉ आशीष त्रिपाठी ने कहा कि आज पत्रकारिता चुनौती बनती जा रही है।सही खबर चल जाये तो समस्या बनेगी ही। डॉ अंगद सिंह ने कहा कि समावेशी समाज बनाने के लिए पत्रकारों की भूमिका अहम है। विशिष्ट अतिथि तारकेश्वर मिश्र ने कहा कि आज के बढ़ते दबाव में पत्रकारिता में विश्वसनीयता का अभाव हो गया है।फिर भी पत्रकारिता को भटकाव से से बचाने की जरूरत है।सुधीर रंजन द्विवेदी ने कहा कि आज लोगों को फेंक न्यूज से बचाने की जरूरत है।संगोष्ठी में आभार व्यक्त करते हुए डॉ अर्जुन पाण्डेय ने कहा सामाजिक संरचना में चिकित्सक, अभियन्ता,शिक्षक एवं अधिवक्ता के साथ पत्रकारों की भूमिका सर्वाधिक अहम है। पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका जनता को उन घटनाओं,मुद्दों एवं रुझानों के बारे में सूचित करना है।संगोष्ठी में सूर्य प्रकाश शुक्ल,रमन पाण्डेय,राघवेन्द्र पाण्डेय,अखिलेश मिश्र, अशोक कुमार श्रीवास्तव,अभिषेक त्रिपाठी,अजुग पाण्डेय आदि पत्रकारों के साथ सत्येन्द्र प्रकाश शुक्ल, जगदम्बा तिवारी ‘मधुर’, आशुतोष गुप्ता,राम कुमारी ‘संस्सृति’ आदि की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। संगोष्ठी का संचालन प्रख्यात कवि समीर मिश्र ने किया।
Author: Harshit Shrivastav
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