गौशाला में कीड़ों वाला चारा, बीमार हो रहे पशु – जिम्मेदार अधिकारी मौन!

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विकास भारती/सचिन शुक्ला

मछरेहटा सीतापुर / मछरेहटा विकासखंड की ग्राम पंचायत बहोरनपुर स्थित गौशाला में रखे गए चारे में कीड़ों की मौजूदगी ने प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह समस्या न केवल गौशाला में रहने वाले पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि सरकार द्वारा गौशालाओं के रखरखाव के लिए किए जा रहे दावों की भी पोल खोलती है।

गौशाला में रखे चारे की स्थिति दयनीय

गौशाला के निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि चारे में कीड़े पड़ चुके हैं, और उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। पशुओं को खिलाया जा रहा चारा सड़ चुका है, जिससे कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। पशु कमजोर और बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।गौशाला में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इस बारे में सूचना दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पशुओं को अच्छा चारा उपलब्ध कराने के बजाय खराब चारे को ही जबरदस्ती खिलाया जा रहा है।

गौशाला में बीमार हो रहे हैं पशु, कोई इलाज नहीं

गौशाला में सैकड़ों गायों को आश्रय दिया गया है, लेकिन उनकी देखभाल के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। पशुओं को समय पर चारा नहीं मिलता, और जो मिलता है, वह खाने योग्य नहीं होता। कई गायें बीमार पड़ी हैं, लेकिन उनके इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। यहां की सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है, जिससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी रहती है।

अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाई चिंता

जब इस संबंध में गौशाला के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यह उनकी लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। प्रशासन की इस उदासीनता से गौशाला की बदहाल स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है।गौशाला की स्थिति को देखकर ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है। वे चाहते हैं कि गौशाला में रखे पशुओं को स्वच्छ चारा मिले, उनकी उचित देखभाल हो और बीमार पशुओं का समुचित इलाज किया जाए।प्रशासन की यह गंभीर लापरवाही न केवल गौशाला में रह रहे पशुओं के लिए बल्कि सरकार की पशु-कल्याण योजनाओं की साख के लिए भी बड़ा झटका है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर कब जागते हैं और क्या ठोस कदम उठाते हैं!

Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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