सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए एक समर्पित Ministry of Welfare of Economically Weaker Sections (EWS) की स्थापना पर गंभीरता से विचार करे- प्रवीण प्रकाश (आईएएस)

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सहारा जीवन न्यूज

माननीय प्रधानमंत्री जी,

हाल ही में UGC के नवीनतम विनियमों पर आई प्रतिक्रियाओं से एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई है—देश के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के मन में यह भावना जन्म ले रही है कि उनकी समस्याओं और आकांक्षाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए ऐसी भावना शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती। यह केवल नीति का प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय एकता का विषय भी है।

इसी व्यापक संदर्भ में वर्ष 2019 में भारत सरकार ने संविधान संशोधन कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में 10% आरक्षण का ऐतिहासिक प्रावधान किया। यह निर्णय दूरदर्शी था और सामाजिक न्याय की अवधारणा को एक नया आयाम प्रदान करता है।

किन्तु शासन–प्रशासन में तीन दशकों के अनुभव के आधार पर मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि किसी भी नीति या अधिनियम का निर्माण उसकी यात्रा का केवल 20% भाग होता है; शेष 80% उसकी प्रभावी, सतत और पारदर्शी क्रियान्वयन प्रक्रिया पर निर्भर करता है। सफल कार्यान्वयन के लिए नियमित मॉनिटरिंग, दैनिक प्रगति की समीक्षा, डेटा-आधारित विश्लेषण तथा अवरोधों की समयबद्ध पहचान और समाधान अत्यंत आवश्यक हैं।

आज यदि हम वस्तुनिष्ठ रूप से यह प्रश्न उठाएँ कि पिछले छह वर्षों में 10% EWS आरक्षण देश के किन-किन शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों में पूर्ण रूप से लागू हुआ है, कहाँ आंशिक रूप से लागू हुआ है, और कहाँ अभी तक नहीं हो पाया—तो क्या कोई एक वरिष्ठ मंत्री या अधिकारी समग्र, अद्यतन और तथ्यपरक उत्तर तुरंत प्रस्तुत कर सकेगा? यदि नहीं, तो इसका अर्थ यह है कि इस महत्वपूर्ण नीति के लिए एक समर्पित, एकीकृत और केंद्रित संस्थागत ढाँचे की आवश्यकता है।

हमारे अनुभव में यह सिद्ध हुआ है कि जब किसी विशिष्ट सामाजिक वर्ग के लिए पृथक मंत्रालय या विभाग स्थापित किया जाता है—जैसे Tribal Welfare Department, SC Welfare Department, Minorities Welfare Department—तो नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और मूल्यांकन तक एक स्पष्ट उत्तरदायित्व विकसित होता है। परिणामस्वरूप योजनाओं का प्रभाव अधिक संगठित और मापनीय बनता है।

उपरोक्त अनुभवों के आलोक में मेरी विनम्र प्रार्थना है कि भारत सरकार सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए एक समर्पित Ministry of Welfare of Economically Weaker Sections (EWS) की स्थापना पर गंभीरता से विचार करे। यह मंत्रालय न केवल आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, बल्कि छात्रवृत्ति, कौशल विकास, उच्च शिक्षा सहायता, उद्यमिता प्रोत्साहन और रोजगार संवर्धन जैसी समग्र नीतियों का भी समन्वित संचालन कर सकेगा।

आपके नेतृत्व में यदि केंद्र सरकार ऐसा कदम उठाती है, तो निश्चय ही राज्य सरकारें भी अपने-अपने राज्यों में इसी प्रकार के विभाग स्थापित करने के लिए प्रेरित होंगी। यह पहल सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के मन में विश्वास और सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करेगी तथा सामाजिक समरसता को नई शक्ति प्रदान करेगी।

यह समय केवल प्रावधानों के अस्तित्व का नहीं, बल्कि उनके परिणामों की स्पष्ट और पारदर्शी सुनिश्चितता का है।

Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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