सहारा जीवन न्यूज 
लखनऊ। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO) के पर्यवेक्षण में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) द्वारा मानव तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी और सराहनीय सफलता सामने आई है। 20 जनपदों में तैनात निरीक्षक एवं उप निरीक्षकों ने अथक परिश्रम और सतत प्रयासों से दो वर्ष से अधिक समय से गुमशुदा बच्चों को सकुशल बरामद कर उनके परिजनों से मिलवाया। बच्चों को मानव तस्करी के जाल से मुक्त कर सुरक्षित भविष्य देने वाले इन असाधारण प्रयासों के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया।
महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान संगठन की मुखिया अपर पुलिस महानिदेशक श्रीमती पद्मजा चौहान ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि गुमशुदा बच्चों की खोज और उन्हें तस्करी से बचाकर परिवार से मिलाना न केवल पुलिस की जिम्मेदारी है, बल्कि यह एक मानवीय और सामाजिक दायित्व भी है। एएचटीयू के विवेचना अधिकारियों द्वारा किया गया यह कार्य पूरे प्रदेश की पुलिस के लिए प्रेरणास्रोत है।
सम्मानित किए गए पुलिसकर्मियों में मुरादाबाद से निरीक्षक विनोद कुमार, बिजनौर से निरीक्षक ऋषि गोपाल सिंह, अमरोहा से निरीक्षक राजेंद्र कुमार, महाराजगंज से निरीक्षक जयप्रकाश सिंह यादव, सिद्धार्थनगर से निरीक्षक गौरव सिंह, गोंडा से निरीक्षक लाल बिहारी, हरदोई से निरीक्षक उमाकांत दीपक, फतेहपुर से निरीक्षक संजय कुमार पांडे, बांदा से निरीक्षक रंजीत गौड़, आजमगढ़ से निरीक्षक अभय राज मिश्रा, कमिश्नरेट लखनऊ से निरीक्षक दशरथ सिंह, देवरिया से निरीक्षक सुरेश कुमार वर्मा सहित आजमगढ़, मऊ, देवरिया, लखनऊ, वाराणसी और कासगंज के उप निरीक्षक शामिल रहे। एडीजी डब्ल्यूसीएसओ ने सभी सम्मानित पुलिसकर्मियों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनकी निष्ठा, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के कारण कई परिवारों को वर्षों बाद अपने खोए हुए बच्चों की खुशी मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मान प्रदेश के अन्य पुलिसकर्मियों को भी बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए और अधिक प्रेरित करेगा।





