सहारा जीवन न्यूज 
वाराणसी।गजल संग्रह देख सको तो देखो की गजलें देश के बहुसख्यक मेहनतकशों के जीवन और उनकी धड़कनों से जुड़ी है। पराग जी की गजलो में इन्हीं आम आदमियों के जीवन की समस्याओं का बहुत प्रभावी चित्रण हुआ है। यह बातें साहित्यिक संघ द्वारा जिला राजकीय पुस्तकालय के सभागार में शिव कुमार पराग के गजल संग्रह देख सको तो देखों के लोकार्पण समारोह में बीएचयू के हिन्दी विभागाध्यक्ष वशिष्ठ अनूप ने कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्य भूषण डा जितेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि देख सको तो देखो गजल संग्रह की गजले वक्त का आईना है। इस आईने में वह सब कुछ देखा जा सकता है जो समाज में आज घटित हो रही हैं।लखनऊ से पधारे साहित्यकार कौशल किशोर ने कहा कि इस संग्रह की गजले सिर्फ स्थितियों का चित्रण वर्णन नहीं करती बल्कि उन कारकों की पड़ताल कर उन्हें सामने भी लाती है, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।इस तरह से गजले पाठकों की चेतना से जुड़ती है। जयप्रकाश धूमकेतु (मऊ) ने बताया कि इन गजलों में तमाम तरह की हलचलों सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों से उत्पन्न हालात का जायजा मिल सका है। कमलेश वर्मा ने बताया कि इस संग्रह की गजले यथार्थ की जटिलताओं से हमें रूबरू कराती है। साथ ही भविष्य के प्रति आश्वस्ति प्रदान करती है। प्रो श्रद्धानन्द का मत था कि जनवादी तेवर की यह गजले आमजन के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़ी होती है। वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय ने कहा कि पराग आज के दौर के समर्थ गजलकार है जिनकी गजलों में समाज की सच्चाई दिखती है। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में सुरेन्द्र वाजपेयी धर्मेन्द्र गुप्त साहिल केशव शरण अभिनव अरुण गिरीश पाण्डेय ओम धीरज,संतोष प्रीत,प्रसन्न बदन चतुर्वेदी ,शरद श्रीवास्तव, प्रीत भाई , आलोक सिंह , अखलाक अहमद , संजय सिंह , संजीव सिंह , प्रसन्न बदन चतुर्वेदी , कंचनलता चतुर्वेदी , डॉ साधना साही , डॉ पुष्पा सिंह, डॉ. अत्रि भारद्वाज, बुद्धिदेव तिवारी कुमार महेन्द्र, मासूम मंजरी पाण्डेय आदि ने काव्य पात किया। कार्यक्रम में डॉ रामेश्वर त्रिपाठी, कविन्द्र नारायण, प्रकाश उदय पवन शास्त्री वासुदेव उबेरॉय रामानन्द दीक्षित, डॉ शुभा श्रीवास्तव, श्री नरेन्द्र नाथ मिश्र ही बेनी माधन की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। स्वागत डॉ. दयानिधि मिश्र संचालन डॉ. रामसुधार सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन कंचन सिंह परिहार ने किया।





