सीतापुर, उत्तर प्रदेश | रिपोर्ट: विकास भारती / उत्तम शर्मा, सहारा जीवन न्यूज़
लहरपुर ब्लॉक में सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की जड़ें दिन-ब-दिन गहराती जा रही हैं। आए दिन रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि जिम्मेदार अधिकारी इन मामलों पर मौन साधे हुए हैं।
ताजा मामला लहरपुर विकासखंड का है, जहां ग्राम पंचायत विजैसेपुर मजरा बरेती जलालपुर निवासी रामबहादुर पुत्र संकटा प्रसाद ने जिलाधिकारी सीतापुर को IGRS पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है।
रामबहादुर ने अपनी बहन केतकी की शादी के अनुदान हेतु विकासखंड कार्यालय लहरपुर में समाज कल्याण अधिकारी के पास आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन दिनांक 10 जून 2025 को अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “सिर्फ आवेदन देने से काम नहीं चलेगा, ₹5000 नजराना देना होगा।” जब रामबहादुर ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पैसे देने में असमर्थता जताई, तो अधिकारी ने साफ मना कर दिया और कहा कि “अब तुम जाओ, तुम्हारी फाइल नहीं लगेगी।”
यह घटना यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आमजन को कितनी जिल्लत का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों द्वारा खुलेआम रिश्वत की मांग करना न केवल प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या अब ईमानदारी केवल किताबों तक सीमित रह गई है?
इस गंभीर शिकायत के बावजूद, संबंधित समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति न केवल शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास डगमगा रही है, बल्कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला उदाहरण भी बन रही है।
सवाल यह है कि क्या चंद पैसों के लालच में गरीब और ज़रूरतमंद जनता के हक को यूं ही रौंदा जाता रहेगा? प्रशासन कब जागेगा?
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Author: Harshit Shrivastav
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