आदर्श शासन की शिल्पकार एवं सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना की अग्रदूत थी अहिल्याबाई-सुधांशू शुक्ला

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गौरीगंज,अमेठी। शिव भक्त,पुण्य श्लोक देवी अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी 300 वीं जयंती स्मृति अभियान के अन्तर्गत शुक्रवार को नगर पालिका जायस, नगर

पालिका गौरीगंज, नगर पंचायत अमेठी व मुसाफिरखाना द्वारा गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें नगर पालिका जायस एवं गौरीगंज में मुख्य अतिथि, वक्ता प्रदेश कोषाध्यक्ष रानिका जायसवाल रही। नगर पंचायत अमेठी में जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा विषुव मिश्रा व नगर पंचायत मुसाफिरखाना में जिला मंत्री प्रभात शुक्ला रहे। जायस एवं गौरीगंज में गोष्ठी की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने किया।बतौर मुख्य अतिथि रानिका जायसवाल ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अहिल्याबाई नारी सशक्तिकरण की मिसाल थी।अहिल्याबाई होल्कर को धर्म,न्याय और राष्ट्रधर्म का सजीव स्वरूप बताया।यह भी कहा कि विदेशी आक्रांताओं के कालखंड में जिस साहस, भक्ति और समर्पण से काशी से लेकर रामेश्वरम तक देश के अनेक तीर्थस्थलों का पुनरोद्धार कराया वह भारतीय इतिहास का अद्वितीय अध्याय है, अहिल्याबाई होल्कर आदर्श शासन की शिल्पकार रही हैं जिनकी प्रशासनिक दक्षता उन्होंने खुद ही लगान वसूली न्याय और प्रजा की समस्याओं का समाधान प्रारंभ किया और राजकोष को जनता का धन समझते थी अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमद नगर जनपद स्थित चांडी ग्राम में हुआ था अहिल्याबाई प्रारंभ से ही विलक्षण प्रतिभा और प्रखर बुद्धि थी उनके पिता मैंकोजी शिंदे मराठा साम्राज्य में पाटिल के पद पर कार्यरत थे उन्होंने अपनी पुत्री को मर्यादा नीति और धर्म का संस्कार बचपन में ही दिया था विवाह के उपरांत अहिल्याबाई मालवा राज्य की बहू बनी और कालांतर में राज्य की महारानी यह मार्ग सरल ना था युद्ध में पति खंडेराव की मृत्यु फिर ससुर मल्हा राव का निधन और अंततः इकलौते पुत्र वाले राव की आशा माइक मृत्यु यह सारे आघात अहिल्याबाई पर एक के बाद एक टूटे परंतु उन्होंने इन्हें दुर्बलता नहीं बल्कि दायित्व का आवाहन समझा 11 दिसंबर 1767 को जब उन्हें विधिवत राज्याभिषेक कर राज सिंहासन सोपा गया तब उन्होंने न केवल राज्य को स्थाई तो दिया बल्कि अपनी दूर दृष्टि न्याय प्रियता और धर्म निष्ठा से उसे समृद्धि की ओर अग्रसर कियाउन्होंने देश भर में मंदिरों को धर्मशालाओं और घाटों का निर्माण कराया जिनमें काशी गया सोमनाथ द्वारिका रामेश्वरम जैसे तीर्थ स्थलों का विशेष उल्लेखनीय स्थान है अहिल्याबाई न केवल धर्म प्रेमी थी बल्कि उत्कृष्ट शासन भी वह सैनिक रणनीति में निपुण थी राज्य की आय पर प्रणाली को व्यवस्थित करती थी और महिला सशक्तिकरण का मूर्ति मां प्रेरणा थी उनके शासनकाल में मालवा की और राजनीतिक रूप से स्थिर रहा बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नयन का भी केंद्र बना 13 अगस्त 1795 को जब अहिल्याबाई लोक से विदा हुई तब वह अपने पीछे एक आदर्श राज्य मॉडल छोड़ गई जिसमें शक्ति सेवा आयोग और संयम का प्रतीक माना जाता है अहिल्याबाई किसने की समस्याओं को प्राथमिकता दी और सिंचाई के लिए नहरों तालाबों और जलाशयों का निर्माण कराया।

भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आदर्श शासन की शिल्पकार एवं सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना की अग्रदूत थी,अहिल्याबाई के जरिए आधी आबादी मातृशक्ति को सशक्त बनाने के लिए पार्टी बूथ स्तर तक अभियान चला रही है।उन्होंने सभी से होल्कर के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

प्रवक्ता चन्द्रमौलि सिंह ने जानकारी देते बताया कि गोष्ठी में प्रमुख रूप से पूर्व ब्लॉक प्रमुख तिलोई कृष्ण कुमार सिंह मुन्ना,जिला महामंत्री राकेश त्रिपाठी,अशोक मौर्य जिला मन्त्री भाजपा,रमेश सिंह पूर्व प्रमुख,नीरज सिंह,श्रीमती मनीषा अध्यक्ष नगर पालिका जायस,अनोखेलाल सोनकर मण्डल अध्यक्ष,श्रीमती आशा बाजपेई जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा,सहित मातृशक्ति उपस्थित रहे।

Harshit Shrivastav
Author: Harshit Shrivastav

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