लालगंज, प्रतापगढ़ (खपराही):
खपराही गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में मग्न होकर भावविभोर हो उठे। कथा वाचक आचार्य कौशलकिशोर जी महाराज ने भगवान की नीतियों और उनके चरित्र के विविध आयामों को उजागर करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के स्वंयवर में इच्छित वर बनने का जो वरदान दिया, वह नारी गरिमा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग अन्याय और आततायियों पर सत्य की विजय का शाश्वत संदेश देता है।
आचार्य कौशलकिशोर जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म, सत्य और नीति के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान को जिस स्वरूप में भजना जाता है, वे उसी रूप में भक्तों को मंगलमय प्रसाद प्रदान करते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र को भगवान के प्रति समर्पण की अनुपम मिसाल बताया और कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण जीवन में अलौकिक सुख और शांति का संचार करता है। कार्यक्रम के दौरान चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी और रूरल बार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने आचार्य कौशलकिशोर जी का माल्यार्पण कर श्रीवस्त्र भेंट करते हुए सम्मानित किया। इस अवसर पर संयोजक पं. शिवकुमार मिश्र व कृष्ण कुमार मिश्र द्वारा व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया गया। सह-संयोजक अनिल मिश्र, सुधाकर मिश्र व प्रभाकर मिश्र द्वारा महाप्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई।
कार्यक्रम में अखिलेश द्विवेदी, मनीष क्रांतिकारी, पंकज मिश्र, अरुण पांडेय, आनंद पांडेय, पं. रमाशंकर शुक्ल, सुनील त्रिपाठी, महंत द्विवेदी, रमाकांत द्विवेदी, अजय द्विवेदी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
स्वागत सुशील मिश्र ने किया जबकि आभार प्रदर्शन भास्कर मिश्र द्वारा किया गया।
Author: Harshit Shrivastav
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