सहारा जीवन न्यूज 
लखनऊ।बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ (बीबीएयू) में 10 दिवसीय अनुसन्धान पद्धति कोर्स का समापन हुआ।मुख्य अतिथि के रूप में डीन अकेडमिक अफेयर्स प्रो.एस विक्टर बाबू शामिल हुये।उन्होंने बताया कि शोधार्थी को केवल डिग्री ही नहीं बल्कि शोध की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।अनुसन्धान पद्धति कोर्स की निदेशक डॉ.तरुणा ने बताया कि सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध की गुणवत्ता, उपयोगिता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए आधुनिक शोध पद्धतियों, सॉफ्टवेयर और तकनीकी कौशल का ज्ञान आवश्यक है।विशेष रूप से शोध के माध्यम से समाज की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं तथा अनुसंधान-आधारित समाधान प्रदान करने के लिए नीतिगत सुझाव दिए जा सकते हैं।10 दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कोर्स डॉ.तरुणा ने बताया कि कार्यशाला में देश के 8 राज्यों के 22 विश्वविद्यालयों से कुल 30 शोध छात्रों ने भाग लिया।इन दस दिनों में 30 सत्र हुए, जिसमें सामाजिक विज्ञान क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने ‘अनुसन्धान पद्धति’ के विविध आयामों- अनुसंधान डिजाइन, मात्रात्मक, गुणात्मक और मिश्रित शोध प्रविधिओं, डेटा संग्रह तकनीकों, शोध प्रश्नों का निर्माण, डेटा विश्लेषण, साहित्य पुनर्निरीक्षण, शोध पत्र लेखन, और प्लेजियरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा किया। शोध में नैतिकता पर चर्चा करते हुए डॉ.तरुणा ने कहा कि किसी भी विषय पर शोध करते समय हमारे सामने कई नैतिक मुद्दे आते हैं, जिनका हमे ध्यान रखना होता है।नैतिकता शोध के प्रत्येक स्तर-आंकड़ा संग्रह से उसके लेकर विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और प्रकाशन में प्रत्येक होनी चाहिए।विभागाध्यक्ष प्रो.अमित सिंह ने सभी सभी वक्ताओं, अतिथिओं, और प्रतिभागियों एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रगति और नरेश ने बताया कि इन दस दिनों में हम लोगों ने शोध की समझ को अधिक गहनता से समझ पाए है।





