भक्त हनुमान जी की प्रभु श्रीराम जी के चरणों में सेवा भक्ति

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अमेठी। दिव्य गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की असीम कृपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा चार दिव सीय श्री हरिकथामृत का आयोजन पूरे गणेश लाल, भरेथा निकट हथ किला चौराहा, दुर्गापुर रोड में हो रहा है। कथा के प्रथम दिवस गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी दिव्येश्वरानंद जी ने सभी भक्तों को बताया कि प्रभु का अवतार इस संसार में भक्तों का कल्याण करने के लिए ही होता है, जो भी इस संसार में भक्त आये सभी ने ईश्वर की भक्ति किया और सेवा करके प्रभु को प्रसन्न किया। वह निराकर परमात्मा जब साकार बनकर इस धरा-धाम में आता है तो कुछ बिरले भक्त होते है जो प्रभु को जान पाते है और उनकी भक्ति- सेवा करके अपने जीवन को कृतार्थ करता है। भक्त हनुमान जी ऐसे ही प्रभु के भक्त थे जो अपने मान का हनन( *हनु+ मान*) करके प्रभु को रिझाया.राम काज कींहे बिनु मोहि कहाँ विश्राम.ऐसे भाव हनुमान जी के अंदर कैसे आये .अन्वेशटम प्रयत्नेन मारूते ज्योतिरांतमम.भगवान् श्री राम जी ने दिव्य दृष्टि प्रदान किया था तभी वे प्रभु को जान पाए। आज भी संसार में हम प्रभु की भक्ति- सेवा करना चाहते है लेकिन ज्ञान चक्षु के अभाव में ईश्वर से शाश्वत प्रेम नहीं हो पाता है। श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से दिव्य दृष्टि की प्राप्ति होती है और ईश्वर की सच्ची भक्ति की प्राप्ति होती है। कथा का शुभा रंभ प्रभु के चरणों में दीप प्रज्ज्वलन से और समापन प्रभु की पावन आरती से हुआ। स्टेज पर संगीतज्ञो ने भजन गाकर भक्ति रस से भक्तों को सरबो र कर दिया। इस कथा में स्वामी विश्वनाथानंद जी, स्वामी शिवशरणानंद जी, साधवी राधा माता जी, एवं संगीत की पूरी टीम तथा श्री राम ताडक शुक्ला , श्री मदन अग्रहरि, श्री राम अवध, श्री श्याम नारायन ओझा, श्री शीतला प्रसाद सिंह, श्री कीर्ति कुमार, इत्यादि की गरिमामयी उपशथि ति रही.

Sahara Jeevan
Author: Sahara Jeevan

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